रक्षा बन्धन
आँखों का छाजन भीग रहा,
हृदय का स्पंदन खीज रहा,
दशकों पहले,,
बस कलाई का धागा शेष रहा,
एक मासूम कली का
सामाजिक कुरीतियों की
भेंट चढ़ जाना,
ताउम्र हमको साल रहा,
ताउम्र हमको साल रहा।
-सूर्य कांत शर्मा
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