आप की खातिर
यूँ तो दुनिया में
और भी हसीं हैं
पर दिल धड़कता है
बस आपकी खातिर।
ख्वाबों ख्वाहिशों
की शहनाई में
तेरी मेरी आशनाई में।
ये दिल तो जुंबिश
लेता है,आपकी खातिर।
बहुत से रहबर मिले
ताउम्र तबस्सुम से मिले
पर ये दिल ना कभी
धड़का उनकी खातिर।
जफ़ा ने भी अपनी
चितवन बिखेरी
हवस को भी भेजा
भरमाने की खातिर।
वफ़ा को पास था
अपनी मुहब्बत
पे यकीं था।
आपका भी दिल ना
आया उस पर
गोया के दिल तो
धड़का पर वफ़ा की
खातिर।
आज के इंसा ने
तरक्की तो कर ली
ज़र जोरू ऑ ज़मीं
के मामले में,
मगर फिर भी
दिल ना धड़का
इन्हीं सब की खातिर।
सारी की सारी
कायनात जुट गई
काबू करने को
इस दिल ए शातिर को।
तिस पर भी ये न धड़का
इन की खातिर।
सब कुछ छोड़
सब से मुंह मोड़ कर।
लो ये आ के धड़का
उसकी चौखट पे
उसकी इबादत की
खातिर।
आपका मित्र
@सूर्यकांत शर्मा
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