यह तो ,
बिल्कुल - -
सोलह आना,
सच है कि - -
कुदरत और किस्मत,
के अनुसार - -
ढ़लना परता है,
इस प्रकार - -
किस्मत ने,
जैसा चाहा - -
वैसे ढल गये हम l
हमने बहुत,
संभल - संभल कर - -
चलने का,
प्रयास किया - -
फिर भी हम,
फिसल गये - -
सच में,
किसी ने - -
विश्वास को तोड़ा,
या यों कहे कि - -
किसी ने,
विश्वास को - -
तोड़ने का,
प्रयास किया - -
और तो और,
किसी ने - -
दिल तोरा,
या दिल तोड़ने का - -
प्रयास किया,
लकिन - -
लोग उल्टे हम पे,
आरोप- प्रत्यारोप - -
लगाने लगे कि,
देखो- देखो - -
कितना बदल गया l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X