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मुक्त आत्मा

                
                                                         
                            ऐसा ही ,
                                                                 
                            
वाक्या श्रीमद गीता में - -
भगवान श्री कृष्ण ने,
अर्जुन को - -
संबोधन में ,
कहा था कि - -
हे पार्थ ,
अगर कोई - -
तुम्हें छोड़कर ,
चला गया हो - -
या चला जाय तो ,
तुम ब्यर्थ चिंता - -
मत करना,
या यों कहे - -
निराश मत होना,
क्योंकि ?
बंधन टूटते ही - -
आत्मा हल्की,
हो जाती है l

इसके अतिरिक्त ,
हनुमान चलीसा भी - -
हमे सिखाती है ,
छुटहि बंदी - -
महासूख होई,
अर्थात् - -
छूट जाना ही ,
ईश्वर की - -
महान कृपा ,
होती है - -
इसलिए,
यही मानकर - -
चलिए कि ,
जो भी होता है - -
अच्छे के लिए,
होता है - -
और,
सब कुछ - -
ईश्वर की ,
कृपा से ही होता है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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