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भटका पथिक

                
                                                         
                            जिस रास्ते पर,
                                                                 
                            
मैं चला या - -
चलने का ,
प्रयास किया - -
सच में,
छला ( ठोकर )गया - -
वो भी ,
कोई और नहीं - -
अपनों ने ही,
मुझे छल लिया - -
फिर भी ,
न ही - -
अपना इरादा बदला,
न ही - -
अपने राहों में,
चलना ही छोड़ा - -
यह मुझे भी,
मालुम नहीं कि - -
क्यों मैं ?
उसी रास्ते पर,
छलता रहा l

सोचा था कि ,
इस बार - -
मैं भी कुछ ,
प्रतिकार करूँगा - -
या यों कहे तो,
जैसा का - -
तैसा ब्यवहार करूँगा,
पर ऐसा नहीं - -
कर सका ,
सोचा था कि - -
हर बार की तरह,
केवल रोशनी - -
नहीं दूँगा - -
उसकी जगह,
धुँवा की गुव्वारा - -
छोडूंगा या,
बस धुँवा दूँगा - -
लकिन ,
ऐसा - -
नहीं हो सका,
चिराग - -
जो ठहरा,
फितरत से - -
जलता ही रहा,
बस - -
जलता ही रहा l
-सुरेश कुमार झा'अल्हर'
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3 महीने पहले

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