सचमुच ,
जिंदगी - -
सुख - दुःख के,
मधुर से ही - -
पूर्ण या ,
परिपूर्ण होता है l
जिंदगी में ,
कभी हँसी की - -
मानो बारिश ,
आ जाती है - -
और कभी ,
इतना दुःख - तकलीफ - -
आ जाता है ,
मानो - -
आँसुओं का ,
समंदर बह रहा हो - -
या यों कहे तो ,
जिंदगी किसी - -
इम्तिहान से भी ,
कम नहीं है l
इस जिंदगी में ,
कभी कल्पना रूपी फूल - -
सच में ,
खिल कर सामने - -
आ जाते हैं,
तो कभी - कभी - -
ऐसा भी होता है कि ,
रेगिस्तान सा - -
बंजर भुमि में ,
ना चाहते हुए भी - -
सफ़र करने के लिए,
मजबूर होना पड़ता है l
लकिन ,
थकना नहीं - -
ए मुसाफिर - -
क्योंकि ?
ये जिंदगी तो ज़िन्दगी,
अवसरों का - -
समंदर है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर '
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