कल रात से
हल्की-हल्की बूंदें
बरस रही हैं
कपड़े
अभी भी
गीले हैं
बालकनी में
कीचड़ से भरा एक जूता
किसी के इंतज़ार में है
एक मक्खी
उस पर लगातार
मंडरा रही है
सोफ़े पर बिल्ली
कब से लेटी है
बिना हिले-डुले
टीवी पर
हर पल परछाइयां
बदल रही हैं
और मैं
डोरमैट पर
ठहरा डस्ट मोट।
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