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बसन्त बहार

                
                                                         
                            आई बसंत बहार
                                                                 
                            
आई बसंत बहार ,ले कर संग अपने
नन्ही नन्ही फुहार !
कर दिया दिल बेचैन ,उमड़ने लगा प्यार
शर्माती शर्माती आँखे करने लगी इजहार !
आई बसंत बहार ,ले कर संग अपने
नन्ही नन्ही फुहार !
टपकती है बरसती है जब जब बून्द
छूती है बदन को जब जब बून्द !
सिसकता है थिरकता है बदन
जब जब ऊपर गिरती है बून्द !
प्यार के पैगाम सुनाने को ,हो जाता है दिल तैयार
आई बसंत बहार ,ले कर संग अपने
नन्ही नन्ही फुहार !
हर कली, हर पत्ती, हर डाली
खोल कर बैठी है अपनी बाहों की थाली !
इकठ्ठा करने को बसंत का प्यार
देख देख कर सुनील का मन ख़ुशी मना रहा है अपार .
आई बसंत बहार ,ले कर संग अपने
नन्ही नन्ही फुहार !
-सुनील कुमार डाबोदिया !
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3 महीने पहले

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