जो मज़ा है अमीरी में, वो कहाँ है फ़क़ीरी में,
रंग भरते हैं अरमान, दौलत की तस्वीर में।
घर में रौनक, दिल में हिम्मत, चेहरे पर मुस्कान रहे,
ज़िंदगी भी खिल उठती है, नेमत की ताबीर में।
मेहनत का जब फल मिलता है, ऊँचा होता है इंसान,
क्या रखा है हाथ फैलाने की हरदम फ़क़ीरी में।
इल्म भी हो, अदब भी हो, दौलत भी हो ईमान के साथ,
यही असली शान दिखाई देती है अमीरी में।
रब से बस इतनी दुआ है, नेकी का धन मिलता रहे,
इज़्ज़त भी कायम रह जाए हर एक जागीर में।
'सुधीर' इतना याद रहे, घमंड कभी मत आने दो,
असली दौलत बसती है इंसान की ज़मीर में।
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