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तेरी यादों के सहारे

                
                                                         
                            मैं तो जी रहा हूँ तेरी यादों के सहारे अब तक,
                                                                 
                            
वरना यूँ ही खुली आँखों से मैं देखा नहीं करता।
हर साँस में तेरा नाम बसा है आज भी,
तेरे बिना यूँ जिंदगी से समझौता नहीं करता।

मेरे जीवन में अँधेरों के सिवा कुछ भी न था,
आज जो रोशनी है, वो तेरे उजाले की वजह है।
तूने थामा था कभी हाथ मेरा अँधेरे में,
आज भी मेरी हर धड़कन उसी सहारे की वजह है।

मेरे आँसू भी सूखकर कह गए मुझसे,
अब रोने की कोई घड़ी शेष नहीं बची।
दर्द इतना सह लिया है मैंने तेरे जाने का,
कि आँखों में भी अब कोई नमी शेष नहीं बची।

तेरे तन की ढलती हुई इन रेखाओं से समझा,
तेरी खामोशी ने भी तेरा दर्द कह दिया।
तू बीमार है, तुझे दवा की जरूरत है,
मेरी मोहब्बत ने तेरा दर्द पढ़ लिया।

तू बस एक बार मुस्कुरा दे मेरे सामने,
मेरी सारी उदासी वहीं ठहर जाएगी।
तेरी साँसों में अगर जिंदगी बाकी है,
तो मेरी साँस भी तेरे साथ चलती जाएगी।
-सूबा लाल "अंजाना"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 hours ago

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