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ऐसा सुअवसर नहीं है दूजा।

                
                                                         
                            श्रावण मास का प्रथम सोमवार,
                                                                 
                            
साथ में है नाग पंचमी का दिन।
चल पड़े कांवड़िये लेकर जल भर,
कांवड़ के रूप हैं भिन्न भिन्न।

जोश सब में भरा हुआ है,
बोल रहें हैं बोल बम बोल बम।
पैरों के छालों की नहीं परवाह,
भक्ति की भावना नहीं है कम।

दूध, गंगाजल से करते अभिषेक,
बेलपत्र चढ़ते हजारों हजार।
असंख्य फूलों से करते श्रृंगार
कावड़ियों की संख्या अपार।

शिव शंकर के साथ साथ,
करते नाग देवता की पूजा।
सोमवार के साथ नाग पंचमी,
ऐसा सुअवसर नहीं है दूजा।

 
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2 महीने पहले

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