पैसा ही सब कुछ नहीं होता
ये तो कहने की बात है,
बिन पैसा कुछ नहीं होता
ये वास्तविक बात है।
पैसे से मिलता है
पैसा न हो तो रिश्ते टूटे,
पैसा ही सबसे बड़ा
पैसे न हो तो अपने रूठे।
बिन पैसे न पूछे कोई हाल
बिन पैसे न मिलता सम्मान,
बड़े छोटे का भेद करता
पैसा ही है अब भगवान।
नीचता दिख जाता लोगो का
पैसा सब करवाता,
पैसा लुभाना जाने
कुलघाटी भी बनाता।
दुषकर्म कर पैसे से ही
मोल अदा कर देते,
दूसरों की इज्जत
सब्जी - भाजी समझते।
पैसों वालों की कमिटी है
रॉब दिखाते पैसे का,
हर चीज पैसे से टोलते
अपना कर दूसरों का।
पैसा ही खेटकियों को
सज्जन बताए रखा है,
पैसे की ताकत उन्हें
बेगुनाह बनाए रखा है।
पैसा बिन जीवन का
एक पल न गुजरने वाला,
पैसा बिन लोगों को
मौत भी न आने वाला।
-श्याम सुंदर सिंह
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