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छोड़ो बीती बातों को

                
                                                         
                            शिकवा भी है तुमसे और तुम्हीं से है प्यार भी,
                                                                 
                            
जिन बातों से था इन्कार कभी, अब है इक़रार भी।

अपनी-अपनी अना में खो दिए जो सुहाने पल,
अब वो नहीं आने वाले, मगर है अब तलक इंतज़ार भी।

जितनी बार तुमने वादा तोड़ा ये दिल टूटा उतनी बार,
धोखा खाकर भी दिल को है तुम्हारा एतबार भी।

छोड़ो बीती बातों को चलो चमन में टहल के आएं,
तुम आए तो बदला मौसम छाई है बहार भी।

जो कह दिया सो कह दिया बदलेंगे नहीं हम कभी,
ग़लत को सही कहेंगे नहीं चाहे कर दें जाँ निसार भी।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
9 घंटे पहले

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