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पीताम्बरा माँ बगलामुखी

                
                                                         
                            पीताम्बर में सजी भवानी, पीत रंग में जग सारा,
                                                                 
                            
तेरे दर पर जो भी आया, माँ तूने उसको दिया सहारा।

माँ बगलामुखी शक्ति अपार,
तेरा जग में नहीं कोई पार,
तेरी महिमा जो गाए माँ,
कट जाए उसके दुख के भार।

शत्रु-बाधा जब घेरने आए,
मन में जब अँधियारा छाए,
तेरा नाम जो हृदय पुकारे,
माँ तू उसके कष्ट मिटाए।

तेरी दृष्टि पड़े जिस ओर,
दुर्बलता हो जाए चितचोर,
तेरी कृपा की छाँव मिले तो,
टूटे मन में जागे भोर।

पीली चुनरी, पीला श्रृंगार,
मुख पर तेरे तेज अपार,
पीताम्बरा हे जगदम्बे,
तू ही शक्ति, तू ही आधार।

वाणी को तू शक्ति प्रदान कर,मन से भय का अंत कर,
सत्य की राह दिखा माँ मुझको,हर संकट से मुक्त कर।

तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ,
तेरा ही गुणगान मैं गाऊँ,
जब तक साँसें चलती जाएँ,
माँ तेरा नाम ही ध्याऊँ।
 
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एक महीने पहले

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