जिसके नाम से काल भी काँपे,
जिसके आगे जग सिर झुकाए,
माथे पर जिसके चाँद विराजे,
वो महाकाल कहलाए।
भस्म रमाए तन पर अपने,
गले में नागों का हार सजाए,
हाथों में त्रिशूल थामकर,
डमरू की धुन जग को सुनाए।
जटा में जिनके गंगा बहती,
नयनों में संसार समाए,
नंदी जिसके द्वार पे बैठे,
भक्त पुकारे-दौड़े आए।
उज्जैन की पावन धरती पर,
तेरा ही जयकारा गूँजे,
हर हर महादेव की ध्वनि से,
मन के सारे अँधियारे टूटें।
जिसने तुझको दिल से माना,
उसका तूने साथ निभाया,
गिरते को तूने हाथ थामा,
रोते को तूने गले लगाया।
न धन माँगूँ, न यश माँगूँ,
न कोई सुख-संसार माँगूँ,
बस इतनी-सी आस रहे प्रभु,
हर जन्म तेरा नाम मैं गाऊँ।
जब तक साँस रहे इस तन में,
तेरी भक्ति दिल में समाए,
अंतिम साँस भी जब निकले,
होठों पर महाकाल ही आए।
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