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माँ, मेरे कर्मों में वास करो

                
                                                         
                            माँ मेरे कर्मों में वास करो,
                                                                 
                            
जीवन का तुम प्रकाश करो।

मन में सेवा, वाणी में प्यार,
सच का देना मुझको आधार।
लोभ न मन के पास धरो,
माँ मेरे कर्मों में वास करो।

ऐसा देना निर्मल मन,
सबको समझूँ अपना जन।
ईर्ष्या का हर नाश करो,
माँ मेरे कर्मों में वास करो।

श्रम की रोटी मीठी हो,
हर मेहनत सफल-सुनीती हो।
भाग्य नहीं, विश्वास भरो,
माँ मेरे कर्मों में वास करो।

धन आए तो दान भी आए,
मान मिले तो ध्यान भी आए।
अहंकार का ह्रास करो,
माँ मेरे कर्मों में वास करो।

दीप जले तो मन भी जले,
प्रेम बहे तो द्वेष भी ढले।
हर अँधियारा नाश करो,
माँ मेरे कर्मों में वास करो।

चरण-कमल की धूल मिले,
जीवन को सच्चा मूल मिले।
भक्ति का मधुमास करो,
माँ मेरे कर्मों में वास करो।

सोना-चाँदी कम भी हो,
मन का दीप न कमज़ोर हो।
संतोष का उपहार धरो,
माँ मेरे कर्मों में वास करो।

जब तक साँसें साथ रहें,
तेरे गुण हर बात कहें।
जीवन सफल, उजास करो-
माँ मेरे कर्मों में वास करो।
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2 महीने पहले

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