चंडिका माँ के नाम से, हर भय दूर हो जाए,
तेरी एक कृपा से माँ, हर संकट मिट जाए,
जब-जब अधर्म बढ़े धरती पर, तू रण में उतर आती,
अन्याय की हर दीवार को, पल में चूर कर जाती।
तेरे हाथों में शक्ति अपार, तेरी आँखों में ज्वाला है,
तेरे चरणों में झुकता जग, तू ही जग की रखवाला है,
रक्तिम आभा, सिंह सवारी, मुख पर तेज निराला है,
तेरे नाम का दीप जले तो, मिटता मन का काला है।
माँ, जब राहों में काँटे हों, तू फूल बिछा देती है,
जब आँखों में आँसू हों, तू हँसना सिखा देती है,
जो सच्चे मन से तुझको पुकारे, तू दौड़ी चली आती है,टूटी हुई उम्मीदों में फिर, जीवन-ज्योति जला जाती है।
ना माँगूँ मैं धन-दौलत, ना जग का कोई मान,
बस चरणों में तेरे माँ, बना रहे मेरा ध्यान,जब अंतिम साँस चले मेरी, होंठों पर तेरा नाम रहे, माँ चंडिका की छाया में, मेरा हर जन्म तमाम रहे।
जय चंडिका माँ, जय शक्ति भवानी,तेरी महिमा सबसे न्यारी, तू ही जग की महारानी।
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