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फिर नया सफ़र शुरू हो जाता है

                
                                                         
                            एक दौर कभी थम जाता है,
                                                                 
                            
एक मौसम भी ढल जाता है,
जिसे समझते हैं आख़िरी पल, वो पल आगे बढ़ जाता है।

कुछ चेहरे पीछे छूटते हैं,
कुछ रिश्ते दूर निकलते हैं,
कुछ सपने आँखों में रहकर
चुपके-चुपके बिखरते हैं।

कल तक जिन राहों पर चलकरहमने अपना घर बनाया था,वक़्त ने एक दिन मुड़कर वही रास्ता भुलाया था।

मन रोया, आँखें भीगीं,
दिल ने लाख सवाल किए,
क्यों अपने ही हाथों हमने
कुछ खूबसूरत ख़्वाब दिए?

फिर भीतर से आवाज़ आई-
ठहर ज़रा, ये अंत नहीं,
जिस राह का दरवाज़ा बंद हुआ,हर राह का अंत नहीं।

सूरज डूबा, रात भी आई,
रात के बाद सवेरा है,
वक़्त भले ही बदल गया हो,
जीने का हौसला मेरा है।

जो छूटा, उसकी याद रहेगी,
जो मिला, उसका मान रहे,
जो आने वाला कल है अपना,उस पर थोड़ा विश्वास रहे।

ज़िंदगी भी अजब मुसाफ़िर,
रुकती है, फिर चलती है,
एक कहानी खत्म करे तो
दूजी कहानी लिखती है।

इसलिए जो बीत गया है,
उसको बोझ बनाना क्या?
जिस मोड़ ने रोका था तुमको,उस मोड़ पर फिर आना क्या?

एक दौर अगर खत्म हुआ तो
दूसरा दौर सज जाता है,
ज़िंदगी का एक सफ़र थमता है,तो नया सफ़र शुरू हो जाता है।

और शायद यही ज़िंदगी है-
टूटना, सँवरना, फिर चलना,
हर अंत को आँखों से पढ़ना,
हर शुरुआत को दिल से समझना।

क्योंकि जो आज खत्म दिखाई दे,कल वही शुरुआत बनेगा,जो रास्ता आज सूना है,कल वही कारवाँ बनेगा।

दौर बदलते रहते हैं,
सफ़र बदलते रहते हैं,
ज़िंदगी खत्म नहीं होती-
बस उसके अध्याय बदलते रहते हैं।

एक दौर कभी थम जाता है,
एक मौसम भी ढल जाता है,
जिसे समझते हैं आख़िरी पल, वो पल आगे बढ़ जाता है।

कुछ चेहरे पीछे छूटते हैं,
कुछ रिश्ते दूर निकलते हैं,
कुछ सपने आँखों में रहकर
चुपके-चुपके बिखरते हैं।

कल तक जिन राहों पर चलकरहमने अपना घर बनाया था,वक़्त ने एक दिन मुड़कर वही रास्ता भुलाया था।

मन रोया, आँखें भीगीं,
दिल ने लाख सवाल किए,
क्यों अपने ही हाथों हमने
कुछ खूबसूरत ख़्वाब दिए?

फिर भीतर से आवाज़ आई-
ठहर ज़रा, ये अंत नहीं,
जिस राह का दरवाज़ा बंद हुआ,हर राह का अंत नहीं।

सूरज डूबा, रात भी आई,
रात के बाद सवेरा है,
वक़्त भले ही बदल गया हो,
जीने का हौसला मेरा है।

जो छूटा, उसकी याद रहेगी,
जो मिला, उसका मान रहे,
जो आने वाला कल है अपना,उस पर थोड़ा विश्वास रहे।

ज़िंदगी भी अजब मुसाफ़िर,
रुकती है, फिर चलती है,
एक कहानी खत्म करे तो
दूजी कहानी लिखती है।

इसलिए जो बीत गया है,
उसको बोझ बनाना क्या?
जिस मोड़ ने रोका था तुमको,उस मोड़ पर फिर आना क्या?

एक दौर अगर खत्म हुआ तो
दूसरा दौर सज जाता है,
ज़िंदगी का एक सफ़र थमता है,तो नया सफ़र शुरू हो जाता है।

और शायद यही ज़िंदगी है-
टूटना, सँवरना, फिर चलना,
हर अंत को आँखों से पढ़ना,
हर शुरुआत को दिल से समझना।

क्योंकि जो आज खत्म दिखाई दे,कल वही शुरुआत बनेगा,जो रास्ता आज सूना है,कल वही कारवाँ बनेगा।

दौर बदलते रहते हैं,
सफ़र बदलते रहते हैं,
ज़िंदगी खत्म नहीं होती-
बस उसके अध्याय बदलते रहते हैं।
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1 सप्ताह पहले

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