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शीर्षक - वो चर्चा का दौर

                
                                                         
                            वो इक दौर था
                                                                 
                            
जब चर्चा का जोर था।
समस्या पर शोर होता
चर्चा से समाधान होता।
वो भी इक दौर था
जब सांझा चूल्हा जलता था।
जहां गर्मागर्म फुल्के फूलते
चर्चा से मतभेद इसमें घुलते।
वो भी इक दौर था
जब बरगद तले चौपाल गांव में थी।
जहां बड़े बुजुर्ग बैठे रहते
बच्चों को नसीहत देते।
वो भी इक दौर था
जब पनघट से पानी भरते थे।
सुख दुःख की बातें होती थीं
मन का बोझ उतरता था।
वो काॅफी शाॅप का इक दौर था
जो आपसी चर्चा का इक ठौर था।
कॉफी तो इक बहाना होता
चर्चा के लिए वो इक ठिकाना होता।
चर्चा में वैचारिक मनभेद न होते
विचार-विमर्श से मुद्दे सुलझाते।
फिर इक दौर ऐसा आए
एकाकी जीवन में खो जाए।
कुछ ने फंदा गले लगाया
कुछ ने अवसाद में खुद को पाया ।
आपसी चर्चा जब रूखसत हुई
आंतरिक कुढ़न की शुरुआत हुई ।
इसीलिए अब आंदोलन होता
जो सत्ता परिवर्तन का आधार होता ।
जो ढूंढते चर्चा से हल
वो कभी न हो जीवन में विफल।
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2 महीने पहले

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