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मिली आजादी है यहां

                
                                                         
                            मिली आजादी है यहां, कहां आसान थी इतनी ।
                                                                 
                            
कितने सूली चढ़े यहां , सब दबी जुबान थी इतनी ।।

सूरज अस्त कभी ना होता ,
जब गोरी हुकूमत होती ।
क्रूर मार कोड़ो की ऐसी ,
बेबस क़ौम यहां पर रोती ।।
ब्रिटिश की शाख थी यहां , कहां मधु तान थी इतनी ।
मिली आजादी है यहां, कहां आसान थी इतनी ।।

लड़े बारूद गोलों से ,
अनेक गांधी अहिंसा से ।
रहे एक बोस भारत में ,
डरे ना मौत हिंसा से ।।
ए आजादी कैसे मिली , जनता हैरान थी इतनी ।
मिली आजादी है यहां, कहां आसान थी इतनी ।।
पाबंदियां मेरे वतन पर ,
रोक टोक थी कुछ करने को ।
गुलाम थी हर क़ौम यहां ,
बेजुबान सब कुछ सहने को ।।
पीड़ा थी भारी मन में , कहां उड़ान थी इतनी ।
मिली आजादी है यहां, कहां आसान थी इतनी ।।
मां मेरी जंजीरों में ,
संताने थी गुलाम यहां ।
शान कड़ा था इतना कि
मुर्दा कर सलाम यहां ।।
अंधा था कानून यहां , अजीब दास्तान थी इतनी ।
मिली आजादी है यहां, कहां आसान थी इतनी ।।

 
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2 महीने पहले

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