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कदम कदम पर ठोकर

                
                                                         
                            कदम कदम पर ठोकर गहरी खाएं हैं
                                                                 
                            
तब जाकर इस मंजिल पे हम आ पाए हैं
घट जाती है पीर जरा सा बतलाने से
वरना किसने कब अमरत पिलवाये हैं
तेरी सूरत आँखों से ओझल होते ही
ख्वाबों ने भी ख्वाब नये से दिखलाये हैं
एक बार तुम मेहमाँ बनकर भले पधारो
दिल की राहों में मखमल बिछवाये हैं
दास दिलों की नादानी की यही कहानी
आसमान से चाँद सितारे सब लाये हैं. .
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9 घंटे पहले

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