नानी मेरे पंख गर होते..
आसमान के सैर मैं करता
चिड़ियों के संग मेल मिलाकर
मिलो तक दूरी तय करता
नानी मेरे पंख गर होते...
चुगता मैं भी आंगन के दाने
अपने हो या घर दूसरों कि
लोग भले हो सब अनजाने
फुदक कूद करता डाली पर
बनता मौसम जब मधुर सुहाने
नानी मेरे पंख गर होते...
आसमान के सैर मैं करता
बहे तूफान चाहे अम्बर में
शिवा के होते कभी ना डरता
नानी मेरे पंख गर होते...
- शिव शंकर
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