मुर्दों के शहर में
आवाज लगता हूँ।
कोई जिंदा नहीं
बार बार भूल जाता हूँ।।
गुजरता हु तो इन गलियों से
तेरी मुस्कराहट याद आती है।
शायद यही कारण है कि
गलती बार बार हो जाती है।।
बड़ी उम्मीद से
इक अच्छा सौदा लाया था।
पर अफ़सोस,
शहर में सन्नाटा छाया था।।
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