मैं; आँखें बंद कर
सारा जहाँ घूम आती हूँ
बस शुरुआत खुद से करूंगी ।
सबसे पहले गहरी सी साँस भरूंगी
फिर देखूँगी तमाशे
इंसानी ज़ुबान के
चलूँ ; शहर, नस्ल, धर्म,
ईमान के ,
अरे! बगल में मानवता की बस्ती
भी तो देखी थी
फिर अमेजन गई उठकर
वेगि- सी,
ओजोन तक सैर कर आई हूं
साथ अंटार्कटिका की खबर भी लाई हूं,
अंतरिक्ष की तो पूँछो ही मत
सागर को तो लिखे हैं खत
कि बचाकर रखना बच्चों को
मानव विकास की मिसाइल गिरने वाली है
वैश्विक विधि की यात्रा तो
मैंने अभी अभी टाली है,
वसुधा रक्षा के देश तो कल ही गई
फिक्र न करें
राहत कार्य की विदा(सौगात )न लई;
फोरम , मीडिया, जुबां की सड़क पर
दौड़े चली जाती हूँ
हाँ जी चर्चा हूँ मैं !
सारा जहाँ घूम आती हूँ।
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