आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

पछताने से क्या होगा

                
                                                         
                            सारे हथकंडे अपनाए,
                                                                 
                            
लौट के बुद्धू घर को आए,

होनी टाल न पाया कोई,
अंधियारे को कौन भगाए,

पछताने से क्या होगा अब,
वक्त के रहते अक्ल न आए,

जोश,हौसला और जवानी,
करे वही जो मन को भाये,

छोड़ गया संसार मुसाफ़िर,
चिंता क्यों रह-रहकर खाए,

साथ गया ना बंगला गाड़ी,
ख़ाली हाथ जगत से जाए,

करले नाम कमाई 'गुंजन',
अंत समय में ना पछताये,
--शशि भूषण मिश्र 'गुंजन'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर