सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ।
भींजत मोरी अँखिया, तुम चले आओ॥
घिरि-घिरि आए बदरिया, चमके बिजुरिया।
रिमझिम बूँदा बरसे, भींजे लाल चुनरिया॥
अमवा की डारिया, पड़ल झुलनवा।
तोहरे बिना सूना लागे, मोरा अँगनवा॥
पुरवइया डोले, महके फुलवरिया।
तोरे बिन तरसे मनवा, ओ साँवरिया॥
कदंब तले सखियन गावे, मीठी कजरिया।
तोरे बिन तरसे अँखिया, सूनी अटरिया॥
सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ।
भींजत मोरी अँखिया, तुम चले आओ॥
- सनातन मुकुंद
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