मेरी मुश्किल मेरे हालात को समझने वाला
कोई तो हो मेरे साथ भी चलने वाला।
मैंने तो बस ज़िंदगी से ये ही सबक सीखा है
जीत नही सकता कभी हार से डरने वाला।
दोस्ती करनी हो तो बहुत सोच समझ कर करना यारों
उनमे कोई सांप न हो आपको डसने वाला।
एक दीपक की तरह यूँ ही जलता रहूँगा हरदम
मैं कोई सूरज नही हूँ शाम को ढलने वाला।
मुझको पढ़ना है तो जा के मुझे इंस्टा पे पढ़ो
कोई किस्सा नही मैं अखबार में छपने वाला।
-शैलेश अग्रवाल "नीर"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X