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एक सैनिक की पुकार

                
                                                         
                            ऐ मां मुझे तु अपनी अब गोद में सुला ले
                                                                 
                            
मैं थक गया हूं मुझको आवाज़ दे बुला ले ।।
ऐ -------------------
घायल बदन है मेरा सांसे भी थम रही हैं
गिरते हुए लहू की बूंदे भी जम रही हैं
उंगली पकड़ ले मेरी तू पास में बिठा ले।।
मैं थक गया हूं मुझको आवाज़ दे बुला ले ।।
ऐ मां---------------------
बेटे का फर्ज़ मैंने हसते हुए निभाया
तेरे जिगर का टुकड़ा सरहद के काम आया
ले ले बलाए मेरी आंचल में अब छिपा ले।।
मैं थक गया हूं मुझको आवाज़ दे बुला ले ।।
ऐ मां------------------------
माथे को चूमके तु हौले से थपथपाना
बचपन में जो सुनाई लोरी वो गुनगुनाना
वहीं प्यार फिर से कर तु वहीं लाढ़ फिर लढा ले।।
मैं थक गया हूं मुझको आवाज़ दे बुला ले ।।
ऐ मां -----------------
ना हार मैने मानी ये सांस जब तलक थी
जब तक थी खूं में गर्मी इक आस तब तलक थी
फिर जिंदगी से बोला जा मौत को बुला ले।।
मैं थक गया हूं मुझको आवाज़ दे बुला ले ।।
ऐ मां
जिंदा अगर न लौटा हिम्मत से काम लेना
आएं अगर जो आंसु आंखो में थाम लेना
ये वादा करके करना मुझे आग के हवाले
मैं थक गया हूं मुझको आवाज़ दे बुला ले ।।
ऐ मां ---------------------
-शैलेश अग्रवाल "नीर"
 
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2 महीने पहले

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