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महल मेरे ख़यालों का

                
                                                         
                            महल मेरे ख़यालों का  वो आबाद रखते है,
                                                                 
                            
ना-शाद  नहीं होने देते  दिल शाद रखते हैं।

आते-जाते रहते  वो मेरे ख़्वाबों के जहाँ में,
हसीं एहसासात दिल मेरा आबाद रखते हैं।

इश्क़-ए-मजाज़ी पे यक़ीं नहीं रखते चुनांचे,
ख़यालों में मोहब्बत की  बुनियाद रखते हैं।

ख़यालों में  अपनी  अदम-मौजूदगी  से वो,
दिल का  गुलशन  हर-दम आबाद रखते हैं।

मेरे दिल की दीवार-ओ-दर तस्वीरों से नहीं,
अपनी दिल-नशीं यादों से आबाद रखते हैं।
--- शैलेन्द्र भटनागर "शील "
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3 महीने पहले

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