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ख़ुद के फ़ैसले

                
                                                         
                            ख़ुद के फ़ैसले ही ज़िंदगी की बुनियाद रखते हैं,
                                                                 
                            
हमारी ज़िंदगी ख़ाना-आबाद या बर्बाद करते हैं।

ख़ुदा-न-ख़्वास्ता  कभी बद-वक़्त हो मुक़ाबिल,
हमारे फ़ैसले ही सही मायने में इमदाद करते हैं।

मुश्किल हालात में मक़्सद से भटकने नहीं देते,
कामयाब होने के  माक़ूल रास्ते ईज़ाद करते हैं।

ए'तिमाद ख़ुद पे रखते, कभी नाशाद नहीं होते,
दिल शाद रखने  वास्ते माज़ी को याद करते हैं।

जो लोग ज़िंदगी के  फ़ैसले छोड़ देते हैं ग़ैरों पे,
ता-उम्र वो ग़ैरों से नाला-ओ-फ़रियाद करते हैं।
--- शैलेन्द्र भटनागर "शील "
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2 दिन पहले

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