मज़ाक में भी किसी का
मज़ाक मत उड़ाना, दोस्तों।
शब्दों की चिंगारी कभी-कभी
आग बन जाती है,
और वही आग
एक दिन ख़ुद को भी जलाकर
राख कर जाती है।
-शाहाना परवीन 'शान'
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