जीवन की गति धीरे- धीरे
कम होती जा रही है
सांसे धीरे - धीरे ढलती जा रही हैं
पर मनुष्य का मन
इस बात से बिलकुल अंजान है
वो तो आज भी
सदियों तक जीने के सपने बुन रहा है।
-शाहाना परवीन 'शान
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