बेकाबू सी एक भीड़
मेरे दिल का रास्ता रोकती है
कहती कुछ नहीं बस
तंग वो मुझे करती है।
क्या सही क्या गलत
कुछ समझ नहीं आता उसको
बिना जाने बिना समझे
रास्ता मेरा रोकती है।
-शाहाना परवीन 'शान'
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