जाति पांति से बाहर निकलो
दंगा फसाद से बाहर निकलो
भेदभाव से बाहर निकलो
समानता के राह पर चलो
सदा प्यार के डगर पर चलो
तब यह धरा स्वर्ग बन जाए
अंबर अवनी से हाथ मिलाए
सबके चेहरों पर खुशी जाए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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