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मानवता का पतन

                
                                                         
                            वो इंसान ही थे ना,
                                                                 
                            
जो बह गए बाढ़ में,
हो सकता है कोई जाहिल हो,
जो बैठा हो आड़ में।
दिवंगता की काया से,
कर्णफूल की आस में,
बह गयी रूह मानवता की,
जा फंसी किसी पहाड़ में।
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1 month ago

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