आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सतविन्द्र राणा ' बाल ': समझाना मुश्किल मूर्ख को

                
                                                         
                            होता है आसान ही, मूर्ख बनाना तात
                                                                 
                            
समझाना यह मूर्ख को, बड़ी कठिन है बात
बड़ी कठिन है बात, उसे यह तक बतलाना
कौन यहाँ उपयोग, कर रहा खूब सयाना
' सत ' को देता मात, झूठ को ऐसे बोता
जो बन जाता मूर्ख, उसे मालूम न होता।

जीवन उस दिन खत्म है, जिस दिन चुप हों लोग
मुद्दों पर चुप साध कर, जनें भयंकर रोग
जनें भयंकर रोग, साध्य होना जो मुश्किल
उसको कर स्वीकार, जलेंगे दिल सब तिल-तिल
सतविंदर यदि शब्द, सही खो दें अपनापन
शव जैसी तब देह, मृत्यु सम होगा जीवन।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर