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सतविन्द्र राणा ' बाल ': जड़ का हो उपचार

                
                                                         
                            वर्षों से जो पौधा पाला, वह पोषित भरपूर
                                                                 
                            
गहराई में हैं जड़ उसकी, करती हैं मजबूर
शाखाओं को छांट दिया क्या, नहीं बढ़ेगा पेड़
ध्यान लगा फिर शाखाओं पर, जड़ें रहे कब छेड़

जब रोग जड़ों से फैला है, उनका हो उपचार
जिसकी खातिर लड़ना होगा, उस हित हों तैयार
जिनकी सुईं खूंट में अटकी, उसकी पलटे नोक
सच में हल क्या हो सकता है,कहें कलेजा ठोक

गहराई में बैठे छुपके, जानें कितने चोर
तंत्र सुझाएँ ऐसा जिसमें, मिलें न उनको छोर
दुस्साहस मिलकर न कर सकें, निकले एकल चीख
डिजिटल हो या हो लिखने की, छात्रों के हित सीख

नहीं व्यवस्था सुलझाने का, दे सकते यदि ज्ञान
फिर तो झूठे कह लाएंगे, यहाँ सकल अभियान
एक चला फिर आया दूजा, यही पुरानी रीत
एक-दूसरे पर लांछन के, बजते रहते गीत

कितने शासक बदले लेकिन, बात हुई क्या ठीक
जाने कब से होते आए, कितने पेपर लीक
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3 महीने पहले

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