अब नहीं आराम मुझको बेकरारी रख ली है
जाने वाला जा चुका पर यादें उसकी रख ली है
जानता हूँ फिर कभी उससे नहीं मिल पाउँगा
जाते जाते इसलिए उसकी निशानी रख ली है
चेहरा उसका देख लूंगा जब करेगा जी मेरा
पर्स में तस्वीर इक उसकी पुरानी रख ली है
कोई सुनता ही नहीं है कड़वी बातें आजकल
इसलिए अपनी जबाँ पे मैंने मिस्री रख ली है
सौदेबाजी इस मुहब्बत में बराबर की हुई
दिल के बदले उसकी चाहत हमने गिरवी रख ली है
- सतीश बोरकर
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