सुन्दर रूप इस प्रकृति का आँचल,
जिसका नीला आकाश,
पर्वत जिसका ऊचा मस्तक,
उस पर चाँद-सूरज का ताज।
बिंदियों से सजी धरा यह,
मनमोहक हर आकार,
सार्थक पियुष कहते - यही तो है,
प्रकृति का स्वच्छंद संसार।
नदियों-झरनों से छलकता,
प्रकृति का मधुर मुस्कान,
सतरंगी पुष्प-लताओं ने किया,
इसका सुंदर श्रृंगार।
हर पत्ती, हर कली में,
छिपा है जीवन का सार,
सार्थक पियुष कहते - यही है,
हमारा प्रकृति का संसार।
खेत-खलिहानों में लहलाती,
फसलें देती नव संचार,
मंद-मंद मुस्काती धरती,
देती सबको उपहार।
प्रफुललित जीवन का निश्चल प्यार,
हर कोने में अपार,
सार्थक पियुष कहते - इस प्रकृति को,
मानो अपना यार,
मिट्टी का है, यह हमारा संसार।
-सार्थक पियुष सिंह
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