आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

काली-काली मेघा आओ

                
                                                         
                            काली-काली मेघा आओ।
                                                                 
                            
धरती की तुम प्यास बुझाओ।।
मुरझाये मन को हर्षाओ।
गर्मी को तुम दूर भगाओ।।

वर्षा के जल को बचाओ।
खूब सभी पौधे लगाओ।।
धरा से प्रदूषण दूर भगाओ।
भरपूर वर्षा का सुख पाओ।।
- संतोष बौद्ध
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर