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एक नागरिक का आक्रोश

                
                                                         
                            भारत भूमि पर जनम लिया,
                                                                 
                            
कुछ कर्ज देश का मुझ पर है।
पर आज खड़ी बेबस जनता,
एक क्रूर हुकूमत के डर है।
राम नाम की राजनीति कर,
प्रभु राम को लूटा जाता है।
हम सबकी पावन आस्था पर,
बेशर्मी से थूका जाता है।

एक हजार साल पहले गजनवी ने,
सोमनाथ को ध्वस्त किया।
भारत को कंगाल बनाकर,
जनता को उसने त्रस्त किया।
उसने तो बस एक मंदिर लूटा,
पर आज तो लूट चौतरफा है।

ईमान बिका, कानून बिका,
हर मोड़ पे पहरा झूठा है।
मंदिर लूटे, किसान लुटे,
मजदूरों का भी चैन गया।
अग्निवीर की योजना में,
भारत का वीर गया।
नीट, यूजीसी, पुलिस परीक्षा,
हर पेपर लीक में बिकता है।
मेहनत की स्याही बह जाती,
भविष्य यहाँ धुंधला दिखता है।

आत्महत्या की राह चुनी,
जिन मासूमों ने बेबस होकर।
उन सबके आँगन सूने हैं,
परिवार लुटे हैं सब कुछ खोकर।
दिल्ली लूटी, बिहार लूटा,
ममता का बंगाल लुटा।

वोटों की चोरी कर-करके,
जनता का अधिकार लुटा।
भारत का वो विज्ञानी भी,
भूख हड़ताल पर बैठा है।
जिसने दुनिया को राह दिखाई,
वो सिस्टम के आगे टूटा है।....

 
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3 महीने पहले

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