नाम और गुण में कोइ मेल नहीं है
अपंग है जो खेलता सारे खेल वही है
साहब भी देते हैं जयकार उसी को
जो सही हो देते फटकार उसी को
व्यक्ति का नहीं जमाने का खेल है
कोइ नहीं समझे कैसा ये मेल है
-कुँवर संदीप सिंह
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