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मर जाता जब जमीर

                
                                                         
                            खोती संवेदना मर जाता जब जमीर
                                                                 
                            
जूं रेंगता नहीं तब लगे कोई भी तीर
मर्यादा आत्मा का टूट जाता संपर्क
कोई कुछ कहे नहीं पड़ता कोई फर्क
आँखो पर सजे निर्लज्जता का ऐनक
आत्मा मरे पर चेहरे पर रहे रौनक
मरे अनेक बार औरों की नजर में
माने खुद को सबसे चालाक शहर में
-कुँवर संदीप सिंह
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2 घंटे पहले

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