जाहिर करो जज्बात, हिंदी में करो बात
भारतवर्ष की पहचान, हिंद-हिंदी और हिंदुस्तान
अंग्रेजी से मत तोलो, अपनी भाषा में बोलो
हिंदी है दिल की हूर, मत होना इससे दूर
अ से आप ज्ञ से ज्ञान हिंदी की विशिष्ट पहचान
हिंदी दिवस व हिंदी पखवाड़ा, बजता रहे हिंदी का नगाड़ा
डूबे जब अपनी ही भाषा, औरों से फिर कैसी आशा
हिंदी फैलाओ राष्ट्र बचाओ, गैरों के चंगुल में जाओ
बिन हिंदी के राष्ट्र है मौन, कोई न जाने तुम हो कौन
अपनी बोली अपनी भाषा, अपनों के उन्नति की आशा
भरना हिंदी में हुंकार, ही भारत माँ की जयकार
लिपि देवनागरी देवों का नगर, छोड़ हिंदी न जाओ इधर-उधर
-कुँवर संदीप सिंह
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