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गैरों की लालच में फँसकर

                
                                                         
                            गैरों की लालच में फँसकर
                                                                 
                            
छोड़े जाते हैं अपने कब
जब चली जाएगी जवानी ये
कहाँ काम आएंगे सपने तब

- कुँवर संदीप सिंह
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3 दिन पहले

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