मेवा की ख्वाहिश लिए
नहिं सेवा का योग
बिन चाह सेवा करो
मिले मेवा का भोग
-कुँवर
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X