ज़िंदगी जी तो ले हर कोई पर तरीक़े नहीं आते।।
ज़हन में राज़ रखने के नए सलीके नहीं आते।।
कभी ये धुंधले हो जाए तो कभी ये रूबरू होते,,
क़ब्र की दुनियाँ में भी तो कोई दरीचे नहीं आते।।
उसे ही सोचता है दिल भी जो मिल नहीं सकता,,
धड़कनें से कभी दिल में नए वसीलें नहीं आते।।
अगर कुछ पाना है तुमको बिस्तर छोड़ना होगा,,
यूँ ही घर बैठें रहने से कभी वज़ीफे नहीं आते।।
हर इक बात पर तन्क़ीद बस जिम्मेदारी है तेरी,,
हमें तेरी तरह किसी लाचार पे ठहाके नहीं आते।।
गुज़र तो जाएंगे हम भी गुज़रते वक़्त की तरह,,
ये किस्से पल दो पल के हैं सदी के नहीं आते।।
किसी की याद में कोई यहाँ कब तक जियेगा देव,,
सताए हो जो दुनियाँ के उन्हें लतीफ़ें नहीं भाते।।
-सुनील देव
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