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क्या बनेगा यां।

                
                                                         
                            मुझे भी क़त्ल कर दो अब मेरा भी क्या बनेगा यां।।
                                                                 
                            
ख़ुदा भी नाम का ही है वो भी कुछ ना करेगा यां।।

ये ग़लतफ़हमी तुम्हारी कब तलक देगी तुम्हारा साथ,
दफ़्न जब ख़ाक़ में होंगे तो फिर कुछ ना बचेगा यां।।

कोई जब हाल पूछे आपका तो हंसकर बयाँ करना,,
यहाँ वो दिन भी आएंगे के कोई कुछ ना कहेगा यां।।

किसी को फ़र्क नहीं पड़ता है किसी के दूर जाने से,,
क़ब्र में रहो या क़ैद ओ कफ़स में कुछ ना रहेगा वां।।

अभी तक वहम में ही हो के बहुत मिल जाएंगे अपने
अगर बिच मंझधार में डूबे तो कोई भी ना मिलेगा वाँ

गुलों से खेलना बस तितली का ही अंदाज़ है अच्छा,,
तुम्हारा हाल क्या होगा के ये तुमको पता चलेगा वाँ।

वज़ह कुछ भी नहीं के सब बेवज़ह लगने लगेगा देव,
गर माला सांसों की टूटे तो सब बेगाना लगेगा यां।।।
-सुनील देव
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2 महीने पहले

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