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मैं हूँ हरसिंगार

                
                                                         
                            हैं मेरे कई नाम, पारिजात भी कहा जाता है मुझे,
                                                                 
                            
इस पावन धरती पर हर कोई चाहता है मुझे।
साल भर मैं हूँ अपनी ऊर्जा बचाता,
सर्द की इन ठंडी रातों में ख़ुशबू फैलाता।
नारंगी और श्वेत मेरे ये दो रंग हैं,
स्वर्ग के पौधे सा रूप, मेरा इसके संग है।
चाँद-तारों की महफ़िल होती है मुझको प्यारी,
मेरी ख़ुशबू से महक जाती ये दुनिया सारी।
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5 घंटे पहले

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