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बैंक न माँगे गोपनीय,न लिंक से खुलती जिम्मेदारी,

                
                                                         
                            एक रुपया क्रेडिट हुआ, मोबाइल ने संदेश सुनाया,
                                                                 
                            
प्रसन्न मन झूम उठा, किस्मत ने जैसे हाथ बढ़ाया।
सोचा, बैंक है मेहरबान, एक रुपये का दिया इनाम,
मगर पीछे छिपा था, साइबर ठगों का नया पैगाम!

एक रुपया आया खाते में, "लालच" छाया बातों में,
लिंक खुला एवं खेल हुआ, खाली खाता रातों-रात!
ठग बोले, “बस लिंक दबाओ, सारी खबर बताओ",
कहाँ कमाते-कितने खाते, बैंक का राज समझाओ!

बैंक न माँगे गोपनीय,न लिंक से खुलती जिम्मेदारी,
ओटीपी कभी न देना, अंजान लिंक क्लिक न करें।
1 रु.का लालच छोड़ो, साइबर ठगों से नाता तोड़ो,
धन अर्जन में उम्र लगती, लुटते पल में ध्यान जोड़ो!
-संजय एम तराणेकर
 
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3 घंटे पहले

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